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Friday, March 22, 2013

'मृत्यु प्रिया'/हाइकू

नश्वर जग
तुम नित्य सदा से
मैंने ये पाया
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तुम निष्पक्ष
आज अराजक है
ये जग जब
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दयावान तू
उबे,थके,दुखी के
कर गहती
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छिद्र बहुत
जग ने कर डाले
गले लगा ले
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नौका पाई थी
भव से तरने को
इसे नसाया
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ये रिश्ते नाते
हैं लक्ष्य मे बाधक
तू मिलवा दे
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तुझे दुलारूं
मृत्यु प्रिया जाने क्यूं
सब डरते
-विन्दु

5 comments:

  1. बहुत ही बेहतरीन हाइकू वन्दना जी,आपको भी होली की अग्रिम शुभकामनाएँ.

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  2. आपको भी ढेरो शुभकामनाए होलिकोत्सव की।
    प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार आपका।

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  3. सुन्दर हाइकू!

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  4. कम शब्दों में क्या कुछ नहीं कह दिया .
    नश्वर जग
    तुम नित्य सदा से
    मैंने ये पाया
    यही सबसे बड़ा सत्य है .
    प्रणाम
    विजय

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