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Monday, April 8, 2013

'मुझे वचाना'


आ जाओ खेलो
शीतल छाला देंगे
मित्र बुलालो

थक जाओ ज्यों
आराम करो सब
पंखा नीये त्यों

पक्षी देखोगे
मेरे आंगन आओ
चूजे भी पाओ

छतरी खोई?
बारिश से बचना
आ जाओ नीचे

भूखे,प्यासे हो?
फल खाओ या चूसो
घर लौटो जब

क्यूं पहचाना?
पेड़ मुझे कहते
मुझे बचाना
-विन्दु
(बाल साहित्य)

5 comments:

  1. बहुत ही बेहतरीन सुन्दर हाइकू...

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  2. सादर धन्यवाद महोदय!

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  3. वाह क्या बात है! बहुत सुन्दर!

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  4. आपकी यह सुन्दर रचना निर्झर टाइम्स (http://nirjhar-times.blogspot.com) पर लिंक की गयी है और शनिवार दिनांक 13-4-2013 के अंक में प्रकाशित की जाएगी। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

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