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Saturday, January 5, 2013

न जागे हो ते जागो

मेरा संदेश है यह,
कठिन परिवेश है यह,
समस्या की घड़ी है
मेरे आगे खड़ी है।
जो तू न जाग पाया
क्या होगा हाथ आया!
जरा सा जान खुद को,
जरा पहचान खुद को,
तू अप्रतिम एक योद्धा
तो फिर किस भाँति सुविधा!
कदम भर बस बढ़ा दो...
न जागे हो तो जाग जाओ।।

 दिया क्या तूने जग को
 न ये कर सोंच मन में
 तू कर कुछ काम ऐसा
 न हो फिर कभी जैसा
 ये पथ तेरे लिए है
 तू इस पथ का पथिक है
 न रुक तू एक भी क्षण
 हो बस तेरा यही प्रण
 यही बस आस सबको
 दिया क्या तूने जग को हो
उत्तर यदि सुना दो
 न जागे हो तो जाग जाओ....
             - गोविन्द बाजपेई

3 comments:


  1. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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  2. जी बिल्कुल!
    हमसे जुड़ने के लिये आपको धन्यवाद.
    -विन्दु

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